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गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

विधान की पूजा करने की बजाय संविधान का संवाद हर व्यक्ति के साथ होना चाहिए

भारत के 75 में गणतंत्र दिवस की सभी भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं आज से पूर्व                                                                                                                         29 नवंबर 1949 को महामानव परम पूज्य डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जी ने संविधान सभा के अध्यक्ष के बेटर संविधान सभा को समर्पित किया यह हमें पता है हम सब जानते हैं की संविधान लिखने के लिए महामानव परम पूज्य डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर जी ने काफी परेशान किया 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिनों तक अट परीक्षण करके अनेक सुझाव के बाद यह संविधान उन्होंने बनाया और यही संविधान 26 जनवरी 1950 को हम सब लोगों के लिए हम सब ने स्वयं के प्रति समर्पित किया है इसी का मतलब ऐसा है कि यह संविधान हम अपने प्रति समर्पित करते हैं इसकी जिम्मेदारी इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी इसको संभाल कर रखने की जिम्मेदारी हमारी स्वयं की है जहां तक अगर भारत देश की बात कही जाए यह संविधान उन्हें अधिकार देता है जो यह संविधान को मानते नहीं है वैसा ना कहां सुविधा या अधिकार यह संविधान देता है लेकिन कुछ अराजक तत्व जब इसे जलाने की कोशिश करते हैं इस देश की कानून व्यवस्था इस देश के संविधान के माध्यम से उन्हें देश से निकाल देती है यह ताकत अपने संविधान की है आज देश गणतंत्र दिवस का अमृत महोत्सव मना रहा है अमृत महोत्सव मतलब क्या करते हैं देखा जाए तो हमें पता है कि संविधान की प्रति किसी मेज पर रखी जाती है टेबल पर रखी जाती है उसे फुल मलाई चढ़ाई जाती है उसकी पूजा अर्चना की जाती है क्या यह अपेक्षा है मुझे लगता नहीं संविधान की पूजा करने की बजाय संविधान का संवाद हर व्यक्ति के साथ होना चाहिए और यह संविधान का संवाद जो है हर व्यक्ति तक पहुंचाने के बाद उसकी विचारधारा जो है लोगों तक पहुंच जाएगी और हर एक के मन में कान-कान में यह संविधान जब बैठेगा तो भारत देश की प्रगति चाहे कितने भी प्रतिगामी विचारों के लोग 87 हो जाए या उसके खिलाफ आवाज उठाएं यह जरूर ही

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